काल उसका क्या करे…
जो भक्त हो महाकाल का…
भगवान शिव शाम प्रकृति एवं रुद्रों के लिए भी जाने जाते हैं। देवताओं में शिवजी को एकदम अलग पाया गया है। सृष्टि की उत्पत्ति स्थिति एवं संहार के भी यह आधिपति कहे गए हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदेश कर्ता हैं। ये कालों के काल महाकाल एवं ज्योतिष शास्त्र के आधार हैं। आइये जानते हैं भगवान शिव को प्रसन्न करने के सबसे सरल एवं सिद्ध किए हुए मंत्र।
इन्हें देवों का देव महादेव भी कहा जाता है। शिवजी की आराधना का मूल मंत्र तो ॐ नम: शिवाय ही है। लेकिन इस मंत्र के अतिरिक्त भी कुछ मंत्र हैं जिनसे भगवान शिव बेहद प्रसन्न हो जाते हैं।
भगवान शिव के मंत्र
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥
मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय
मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:॥
शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय
श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:॥
अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।
स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए शिवजी के मंत्र
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ।।
कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय।
सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे।।
ध्यान
ध्याये नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं,
रत्नाकलोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीति हस्तं प्रसन्नं।
पद्माशीनं समन्तात स्तुरिममरगणेव्यार्घृतिं वसानं,
विश्ववाध्यं विश्ववन्द्यम निखिल भहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम॥
स्वच्छ स्वर्णपयोदं भतिकजपावर्णेभिर्मुखे: पंचभि:,
त्र्यक्षरैचितिमीशमिन्दुमुकुटं सोमेश्वराख्यं प्रभुम।
शूलैटंक कृपाणवज्रदहनान-नागेन्द्रघंटाकुशान,
पाशं भीतिहरं उधानममिताकल्पोज्ज्वलांग भेजे॥
ध्यान करें
वन्दे देव उमापतिं सुरुगुरु वन्दे जगत्कारणम,
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं वन्दे पशूनांपतिम।
वन्दे सूर्य शशांक वहिनयनं वन्चे मुकुन्दप्रिय:,
वन्दे भक्तजनाश्रयं च वरदं वन्दे शिवशंकरम॥
शान्तं पदमासनस्थं शशिधर मुकुटं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम,
शूलं वज्र च खडग परशुमभयदं दक्षिणागे वहन्न्तम।
नाग पाशं च घंटां डमरूकसहितं सांकुशं वामभागे,
नानालंकार दीप्तं स्फ़टिकमणिनिभं पार्वतीशं नमामि॥
कर्पूर गौरं करुणावतारं संसार सारं भुजगेन्द्र हारम,
सदा बसन्तं ह्रदयार विन्दे भवं भवानी सहितं नमामि॥
नमस्कार
ॐ नम: शम्भवाय च मयोभवाय च नम:
शंकराय च मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च।
तव तत्वं न जानामि कीदृशोऽसि महेश्वर।
यादशोसि महादेव तादृशाय नमोनम:॥
त्रिनेत्राय नमज्ञतुभ्यं उमादेहार्धधारिणे।
त्रिशूल धारिणे तुभ्यं भूतानां पतये नम:॥
गंगाधर नमस्तुभ्यं वृषमध्वज नमोस्तु ते।
आशुतोष नमस्तुभ्यं भूयो भूयो नमो नम:॥
शिव मूल मंत्र
ॐ नमः शिवाय
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनानत् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
महामृत्युञ्जय मंत्र
ॐ हौं जूं स: ॐ भुर्भव: स्व: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ भुव: भू: स्व: ॐ स: जूं हौं ॐ