ॐ नमः शिवाये तो सब पढ़ते है लेकिन क्या आप यह जानते है ???
श्री शिवषडक्षरस्तोत्रम् एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान शिव को समर्पित है। इसे "षडक्षरी" के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसमें छह अक्षरों का वर्णन होता है: "नमः शिवाय"। यह स्तोत्र शिव के परम रूप की उपासना के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।
यहाँ इसका अर्थ सहित विवरण है:
स्तोत्र: नमः शिवाय च यः पठेच्छिवमंत्रं शाश्वतम्। ध्यानं कुर्यात् सदा शान्तं शिवं शिवं परं हरम्॥
अर्थ: जो व्यक्ति इस शाश्वत शिव मंत्र "नमः शिवाय" का जाप करता है और हमेशा शांतिपूर्वक ध्यान करता है, वह शिव के परम रूप में स्थित हो जाता है, जो शांति और आंतरिक सुख देने वाला है।
षडाक्षरी मंत्र: "नमः शिवाय"
इस मंत्र के प्रत्येक अक्षर का महत्व है:
न – यह तत्व जल को दर्शाता है, जो शुद्धि और पवित्रता का प्रतीक है।
म – यह तत्व पृथ्वी को दर्शाता है, जो स्थिरता और आधार का प्रतीक है।
ः – यह शून्य का प्रतीक है, जो सभी बुराइयों और माया को समाप्त करने का संकेत है।
शि – यह शिव के भौतिक और आध्यात्मिक रूप का संकेत है।
वा – यह विश्व का प्रतीक है, जो सबको संजीवनी देने वाला है।
य – यह योग का प्रतीक है, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त रूप को दर्शाता है।
शिव की पूजा का उद्देश्य: इस मंत्र के जाप से मानसिक शांति, समृद्धि, और दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। यह शत्रुओं से रक्षा करता है और समस्त दुखों से मुक्ति प्रदान करता है। यदि आप इस मंत्र का ध्यान करके नियमित रूप से जाप करते हैं, तो भगवान शिव की कृपा आपके जीवन में बनी रहती है, और आप हर तरह की बाधाओं से मुक्त हो जाते हैं।
श्रीशिवषडक्षरस्तोत्रम्
ॐकारं बिंदुसंयुक्तं नित्यं ध्यायंति योगिनः ।
कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नमः ॥ १॥
नमंति ऋषयो देवा नमन्त्यप्सरसां गणाः ।
नरा नमंति देवेशं नकाराय नमो नमः ॥ २॥
महादेवं महात्मानं महाध्यानं परायणम् ।
महापापहरं देवं मकाराय नमो नमः ॥ ३॥
शिवं शांतं जगन्नाथं लोकानुग्रहकारकम् ।
शिवमेकपदं नित्यं शिकाराय नमो नमः ॥ ४॥
वाहनं वृषभो यस्य वासुकिः कंठभूषणम् ।
वामे शक्तिधरं वेदं वकाराय नमो नमः ॥ ५॥
यत्र यत्र स्थितो देवः सर्वव्यापी महेश्वरः ।
यो गुरुः सर्वदेवानां यकाराय नमो नमः ॥ ६॥
षडक्षरमिदं स्तोत्रं यः पठेच्छिवसंनिधौ ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥ ७॥
॥ इति श्री रुद्रयामले उमामहेश्वरसंवादे षडक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
श्रीशिवषडक्षरस्तोत्रम् का अत्यधिक महत्व है, और यह भगवान शिव के षडक्षरी स्वरूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भगवान शिव की उपासना करने का एक प्रभावी तरीका है, जो शिव की छह मुख्य ध्वनियों (अक्षरों) के माध्यम से उनके दिव्य रूप का गुणगान करता है। यहाँ प्रत्येक श्लोक का अर्थ दिया गया है:
1. ॐकारं बिंदुसंयुक्तं नित्यं ध्यायंति योगिनः | कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नमः ॥ १॥
अर्थ: "ॐ" का रूप बिंदु से जुड़ा होता है, जो हमेशा ध्यान में लाया जाता है। यह योगियों के लिए ध्यान का मंत्र है। "ॐ" शांति, समृद्धि, और मोक्ष प्रदान करने वाला है। हम "ॐ" के स्वरूप को नमन करते हैं।
2. नमंति ऋषयो देवा नमन्त्यप्सरसां गणाः | नरा नमंति देवेशं नकाराय नमो नमः ॥ २॥
अर्थ: ऋषि, देवता, अप्सराएँ और सभी प्राणी भगवान शिव को नमन करते हैं। "न" अक्षर के माध्यम से हम भगवान शिव को नमन करते हैं, जो सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान हैं।
3. महादेवं महात्मानं महाध्यानं परायणम् | महापापहरं देवं मकाराय नमो नमः ॥ ३॥
अर्थ: महादेव, महात्मा, और महान ध्यान के स्वरूप शिव, जो महान पापों को नष्ट करने वाले हैं, उनकी हम पूजा करते हैं। "म" अक्षर के माध्यम से हम उनके दिव्य रूप को नमन करते हैं।
4. शिवं शांतं जगन्नाथं लोकानुग्रहकारकम् | शिवमेकपदं नित्यं शिकाराय नमो नमः ॥ ४॥
अर्थ: भगवान शिव शांति और परम कल्याण के प्रतीक हैं। वे सारा जगत के नाथ हैं और सभी प्राणियों की भलाई के लिए कार्य करते हैं। हम "श" के द्वारा उन शिव को नमन करते हैं।
5. वाहनं वृषभो यस्य वासुकिः कंठभूषणम् | वामे शक्तिधरं वेदं वकाराय नमो नमः ॥ ५॥
अर्थ: शिव के वाहन वृषभ हैं और उनके गले में वासुकी (सर्प) है। वे बाएं हाथ में शक्ति और वेद धारण करने वाले हैं। हम "व" के द्वारा उनका सम्मान करते हैं।
6. यत्र यत्र स्थितो देवः सर्वव्यापी महेश्वरः | यो गुरुः सर्वदेवानां यकाराय नमो नमः ॥ ६॥
अर्थ: जहां-जहां भगवान शिव स्थित हैं, वे सर्वव्यापी और महेश्वर हैं। वे सभी देवताओं के गुरु हैं। हम "य" के द्वारा शिव को नमन करते हैं, जो अनंत और सर्वशक्तिमान हैं।
7. षडक्षरमिदं स्तोत्रं यः पठेच्छिवसंनिधौ | शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥ ७॥
अर्थ: जो व्यक्ति इस षडक्षरी स्तोत्र का जाप शिव के मंदिर या शिव के पास करता है, वह शिवलोक प्राप्त करता है और भगवान शिव के साथ आनंदित होता है।
इति श्री रुद्रयामले उमामहेश्वरसंवादे षडक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम्
यह स्तोत्र भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यधिक शक्तिशाली और प्रभावी माना जाता है, जो शांति, मोक्ष, और आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।